बुधवार के दिन टीवी चैनल स्टार प्लस पर बार बार एक संदेश प्रसारित हो रहा था की सीरियल बिदाई में महर्षि वाल्मीकि के बारे में जो शब्द कहे गए,वे किसी समुदाय विशेष को ठेस पहुचाने के इरादे से नही कहे गए,और सभी सम्बंधित व्यक्ति वाल्मीकि जी का सम्मान करते हैं,
पिछले दिनों एक ख़बर सुर्खियों में थी की करण जोहर ने अपनी आगामी फ़िल्म में बॉम्बे शब्द के इस्तेमाल के लिए एक व्यक्ति विशेष से माफ़ी मांगी, आखिर यह माफियों का सिलसिला कब ख़तम होगा?क्या आजाद होकर भी हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलनी अभी बांकी है?किस बात से डरकर ये माफियाँ मांगी जाती हैं?
क्या हम एक जनतांत्रिक देश में रहते हैं?
सही कहा आपने।लेकिन राजनेता अपना दबदबा बनानें के लिए ऐसी हरकते करते रहते हैं....इसे रोकने में नरमी क्यो दिखाई जाती है...कहने की जरूरत नही.....सब जानते हैं......
जवाब देंहटाएंजी यह जनतांत्रिक नहीं, धनतांत्रिक देश है. और अभिव्यक्ति की आजादी तो थाने के दारोगा साहब, हिंदू कट्टरपंथियों या गाज ठाकरे जैसों की जेब में रहती है।
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