गुरुवार, 8 अक्टूबर 2009

बस थोडी सी आजादी की दरकार है

बुधवार के दिन टीवी चैनल स्टार प्लस पर बार बार एक संदेश प्रसारित हो रहा था की सीरियल बिदाई में महर्षि वाल्मीकि के बारे में जो शब्द कहे गए,वे किसी समुदाय विशेष को ठेस पहुचाने के इरादे से नही कहे गए,और सभी सम्बंधित व्यक्ति वाल्मीकि जी का सम्मान करते हैं,
पिछले दिनों एक ख़बर सुर्खियों में थी की करण जोहर ने अपनी आगामी फ़िल्म में बॉम्बे शब्द के इस्तेमाल के लिए एक व्यक्ति विशेष से माफ़ी मांगी, आखिर यह माफियों का सिलसिला कब ख़तम होगा?क्या आजाद होकर भी हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलनी अभी बांकी है?किस बात से डरकर ये माफियाँ मांगी जाती हैं?
क्या हम एक जनतांत्रिक देश में रहते हैं?